Skip to main content

नई चप्पल - भाई-बहन का प्यार देखकर आंसू आ गये

नई चप्पल"

पार्वती दीनानाथ जी की कोठी में जब काम करने आई तो उसके साथ उसकी लड़की मुनिया भी अपनी अम्मा से जिद करके उसके साथ आ गई। मुनिया सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी, आज मुनिया स्कूल नहीं गई थी इसलिए अपनी अम्मा के साथ कोठी में आ गई थी।

वहां कोठी में दीनानाथ जी की पोती स्वीटी के साथ खेलने लगी, मुनिया को स्वीटी की गुलाबी चप्पल बहुत पसंद आई,वो बार-बार उसकी चप्पल को देखकर सोच रही थी,"काश ऐसी चप्पल मेरे पास भी होती।"

जब मुनिया अपनी अम्मा के साथ घर आ गई तो उसने अपनी अम्मा से कहा,"अम्मा मुझे भी स्वीटी जैसी गुलाबी चप्पल चाहिए, उसकी चप्पल बहुत सुंदर थी।"

अम्मा ने मुनिया का मन रखते हुए कह तो दिया कि जब बाजार जाऊंगी तुम्हारे लिए गुलाबी चप्पल ले आऊंगी,पर पार्वती मन ही मन सोच रही थी कि घर का खर्चा भी जैसे -तैसे पूरा होता है, मैं मुनिया के लिए चप्पल कहां से लाऊंगी।

पार्वती का लड़का जो उन्नीस -बीस साल का था,वो अम्मा और मुनिया की सारी बातें सुन रहा था।उसका पढ़ाई -लिखाई में मन नहीं लगता था उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था,बस इधर-उधर आवारा घूमा करता था, बल्कि आवारा ही हो गया था। वो अपनी मुनिया के लिए नई चप्पल लाने की जुगाड़ करने लगा, सोचने लगा चाहे कैसे भी हो पर मैं अपनी बहन के लिए चप्पल जरूर लाऊंगा, वो चप्पल पहन के खुश हो जायेगी।

अगले दिन ही वो एक मंदिर में गया, भगवान जी के दर्शन किए और लौटते समय किसी बच्चे की गुलाबी चप्पल उठा कर घर ले आया। घर लाकर उसने अपनी बहन को गुलाबी चप्पल दी, मुनिया वो चप्पल पहन के खुशी के मारे नाचने लगी। लेकिन पार्वती ने अपने लड़के से पूछा,"ये चप्पल तू कहां से लाया।"

उसके लड़के ने सारी बात बता दी कि मैं मंदिर से मुनिया के लिए चप्पल चुरा के लाया हूं।

अम्मा ने अशोक को बहुत बुरा-भला कहा, उसको मारा-पीटा और खुद भी रोने बैठ गई। सोचती रही ये पढ़-लिख भी नहीं पाया है, चोरी और करने लगा है, किसी दिन ये जरूर जेल जायेगा।ये लड़का जो दिन न दिखाये वो ही कम है,इस लड़के का आगे न जाने क्या होगा।

ये सब बातें मुनिया भी सुन रही थी कि भय्या मेरे लिए चप्पल मंदिर से चुरा कर लाया है, मुनिया को बहुत दुख हुआ कि भाई ने मेरे लिए चोरी की, मुनिया ने उस चप्पल को फिर कभी दुबारा नहीं पहना।

अपने भाई से बोली,"भय्या! तुम इस चप्पल को उस मंदिर में ही छोड़ आओ, मुझे कोई चप्पल नहीं चाहिए, मैं अपनी पुरानी चप्पल ही

पहन लूंगी।"

पार्वती ने भी दीनानाथ जी कह -सुन कर उन्हीं की फैक्ट्री में उसको चौकीदारी में लगवा दिया था, वहां वो मन लगा कर काम करने लगा। पार्वती अपने लड़के को काम में लगवा कर इसलिए खुश थी कि अब कोई खुरफात लड़के के दिमाग में नहीं आयेंगी क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है।

जब अशोक को पहली तनख्वाह मिली तो वो

अपनी मुनिया के लिए एक गुलाबी चप्पल खरीद कर लाया, मुनिया ने वो चप्पल पहन कर खुश हो कर अपने भाई के गले में अपनी बाहें डाल दीं। पार्वती की आंखों में भी

भाई-बहन का प्यार देखकर आंसू आ गये, उसने भगवान जी से प्रार्थना करती कि ,"हे भगवान! तुम इन दोनों का प्यार सदा ऐसे ही बनाए रखना।"

पार्वती ने अपनी धोती के आंचल से अपने आंसू पोंछ लिए और दीनानाथ जी और उनके पूरे परिवार को उसके लड़के को चौकीदारी की नौकरी पर रखने के लिए दिल से बहुत बहुत आशीर्वाद दिया ।

Comments

Popular posts from this blog

कवि ने उस शव से पूछा ---- कौन हो तुम ओ सुकुमारी, बह रही नदियां के जल में ?

👉 आज तो रूला देगी ये पोस्ट 👈 एक कवि नदी के किनारे खड़ा था !  तभी वहाँ से एक लड़की का शव नदी में तैरता हुआ जा रहा था। तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----     कौन हो तुम ओ सुकुमारी, बह रही नदियां के जल में ?     कोई तो होगा तेरा अपना, मानव निर्मित इस भू-तल मे !     किस घर की तुम बेटी हो, किस क्यारी की कली हो तुम       किसने तुमको छला है बोलो,  क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?     किसके नाम की मेंहदी बोलो,  हांथो पर रची है तेरे ?      बोलो किसके नाम की बिंदिया,  मांथे पर लगी है तेरे ?      लगती हो तुम राजकुमारी,  या देव लोक से आई हो ?       उपमा रहित ये रूप तुम्हारा,  ये रूप कहाँ से लायी हो? ""दूसरा दृश्य----""     ✳कवि की बाते सुनकर,, लड़की की आत्मा बोलती है..     कवी राज मुझ को क्षमा करो,  गरीब पिता की बेटी हूँ !     इसलिये मृत मीन की भांती,  जल...

एक लव स्टोरी - इतना कहने के बाद लड़की ने उसको जोर से गले लगा लिया

एक लव स्टोरी ..... एक. लड़का अपनी फेसबुक में एक लड़की से बात करता था रोज ....हर बात उसे बताया करता था ......और लड़की भी उसको सब कुछ बताया करती थी .......उनकी दोस्ती को 2 साल गुजर गए पर कभी उनकी बाते कम नहीं हुयी .....न. कभी उनकी दोस्ती में कोई कड़वाहट आयी ...एक दिन दोनों ने अपने फ़ोन के नंबर लेलीय और दोनों जब मन. होता कॉल पर बात कर लिया करते ..... लड़की उससे प्यार करने लगी थी क्यों की लड़का उसकी बहुत इज्जत किया करता था .....और उसकी फ़िक्र भी किया करता था ......पर लड़की उसे कह नहीं पायी .....की वो प्यार करती ह ......क्यों की लड़की की शक्ल सूरत अछि नहीं थी और वह बहुत काली थी .....इसलिए उस लड़के को कभी पिक नहीं देती थी ना वीडियो कॉल पर बात करती थी ......पर लड़के से हमेसा बोलती थी कभी मुझसे बात करना बंद मत करना .....लड़का भी प्यार करता था पर उसने सोचा य अपनी पिक नहीं देती तो प्यार के लिए तो कैसे हा करेगी ......पर. लड़के न एक दिन हिम्मत करके उसको प्रपोज कर दिया ....और उसको अपने दिल की बात कह दी और लड़की की आखो में आसु आगये और हा कहने से पहले सोचा म हा कर दूगी तो पिक मागेगा और म तो इस के लायक नहीं हु ....

दहेज प्रथा - दहेज़ ना ले, औरना दे !

दहेज उत्पीड़न मोहल्ले में रहने वाली दो लडकियों मीना और सोनाली की शादी एक ही दिन तय हुई, मीना गरीब घर की लड़की थी उसके पिताजी एक छोटे किसान थे, जबकि सोनाली अमीर घराने की लड़की थी उसके पिताजी का कारोबार कई शहरो में फैला था! शादी वाले दिन मै भी पडोसी होने के नाते काम में हाथ बटाने सोनाली के घर गया, घर पंहुचा ही था की सोनाली के पिता जी लगे अपने रहीसी बताने वो बोले हमारा होने वाला दामाद सरकारी डॉक्टर है, खानदानी अमीर है पर हम भी कहा कम है २० लाख नकद एक कार और सब सामान दे रहे है दहेज़ में ! मैंने कहा ताऊ जी जब वो इतने अमीर है तो आप ये सब उन्हें क्यों दे रहे हो उनके पास तो ये सब पहले से होगा ही, वो बोले अगर ना दू तो बिरादरी मे नाक कट जाएगी पर तू ये सब नहीं समझेगा तू अभी छोटा है, खैर शाम को बारात आ गई मै खाना खाने के बाद मीना के घर की तरफ जाने लगा आखिर उसकी भी तो शादी है ! उसके घर के बहार भीड़ लगी थी मगर ना कोई गाना, ना कोई डांस, ना किसी के चेहरे पर मुस्कान, घर के और करीब जाने पर चीख-पुकार का करुण रुदन मेरे कानो को सुनाई दिया, किसी अनहोनी की आशंका से मेरे दिल जोरो से धडक...